Home कौशाम्बी भूजल सप्ताह के उपलक्ष्य में वर्चुअल वेबीनार संपन्न

भूजल सप्ताह के उपलक्ष्य में वर्चुअल वेबीनार संपन्न


– भूजल का गलत दोहन भविष्य के लिए घातक- डॉक्टर मसूद
– जल संरक्षण में नवीन तकनीक का उपयोग आवश्यक- डॉ आशीष
– विज्ञान क्लब द्वारा आयोजित की गयी आँन लाइन कार्यशाला
कौशाम्बी:
विज्ञान एवम प्रौद्योगिकी  परिषद उत्तर प्रदेश, विज्ञान एवम प्रौद्योगिकी विभाग उत्तर प्रदेश शासन के दिशा निर्देशन में जिला विज्ञान क्लब कौशांबी द्वारा भूजल सप्ताह (16 से 22 जुलाई) के अंतर्गत मुख्य विषय:- जल संरक्षण एक संकल्प है, नहीं है इसका कोई विकल्प से संबंधित  वर्चुअल वेबीनार का आयोजन किया गया। जिसमें विभिन्न विद्यालयों से शिक्षकों ने प्रतिभाग किया। विशेषज्ञों द्वारा गिरते हुए भूजल स्तर पर चिंता व्यक्त करते हुए जल संरक्षण के विषय में महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदान की गयी।इस अवसर इंस्टीट्यूट आफ अप्लाइड साइंसेज प्रयागराज के वैज्ञानिक सलाहकार डॉक्टर मोहम्मद मसूद ने अपने विचार रखते हुए कहा कि भूजल के गलत दोहन से जलस्तर लगातार गिरता जा रहा है जो भविष्य के लिए चिंता का विषय है।  उन्होंने बताया कि पृथ्वी का 74% भाग पानी से ढका है जिसमें 97.3% समुद्री खारा जल एवं  मात्र 2.7 प्रतिशत पीने योग्य जल है । अतः प्रचुर मात्रा में उपलब्ध पीने योग्य जल को दूषित ना करते हुए उसका संरक्षण करें । उन्होंने बताया कि प्रति व्यक्ति प्रतिदिन दैनिक कार्यो हेतु लगभग 40 लीटर पानी की आवश्यकता होती है । उन्होंने बताया कि भारत के परिप्रेक्ष में वर्ष भर में 3000 अरब क्यूबिक  मीटर जल की आवश्यकता होती है जबकि हमें वर्षा के द्वारा 4000 अरब क्यूबिक मीटर जल प्राप्त होता है, लेकिन वर्ष जल का केवल 8% ही हम  संरक्षित कर पाते हैं।कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ आशीष श्रीवास्तव ने कहां की जल एक अमूल्य धरोहर है । जल संरक्षण को आवश्यक बताते हुए इसके लिए नवीन तकनीक के उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने वर्षा जल संचयन एवं वाटर रिचार्ज, ड्रिप सिंचाई की तकनीक पर चर्चा किया। उन्होंने बताया कि दैनिक जीवन में उपयोग करने वाले जल में सभी आवश्यक तत्व होने चाहिए। उन्होंने कठोर जल एवं मृदु जल के स्वास्थ्य के संबंध में  जानकारी प्रदान की। इसी क्रम में वैज्ञानिक कृषि प्रसार डॉ अमित ने अपने विचार रखते हुए बताया कि खेती में प्रचलित सतही सिचाई से अधिक जल व्यय होता है। अतः हम  पाइप द्वारा, ड्रिप सिंचाई, फव्वारा विधि आदि तकनीकों का उपयोग कर  30 से 75% तक जल की बचत कर सकते हैं। उन्होंने फसल चक्र परिवर्तन से जल संचयन के तरीके बताएं। इस अवसर पर समन्वयक, जिला विज्ञान क्लब वसीम अहमद ने कहा कि लगातार गिरता हुआ जलस्तर चिंता का विषय है। आगे कहा कि भू जल संरक्षण हेतु आम जनमानस को जागरूक किया जाना आवश्यक है। हमें अपने दिनचर्या में जल के दुरुपयोग को रोकना चाहिए एवम जल के गलत दोहन न करने के लिए संकल्प लेना चाहिए। भूजल का अधिक दोहन पर्यावरण संरक्षण के लिए भी चुनौती है। कार्यक्रम का संचालन विज्ञान संचारक आयुष साहू ने किया। इस अवसर पर रविंद्र कुमार, प्रताप सिंह, साकेत शुक्ला, संजय कुमार प्रजापति, तेजभान मौर्य, विपिन कुमार, मोहम्मद शाहिद, हबीब अहमद, पूजा पांडे, पूनम सिंह, निशा गुप्ता, गीता कुमारी, कंचन विश्वकर्मा, दिनेश कुमार आदि शिक्षक उपस्थित रहे।

रिपोर्ट – इश्तियाक अहमद (संपादक)

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